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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में शून्य बजट खेती (Zero Budget Farming) की बात की इस योजना का लक्ष किसानों की आय दोगुनी करना है। जिससे भारत की कृषि पर आधारित किसानो के उनयन में मदद मिले। शून्य बजट खेती (Zero Budget Farming) को पाइलेट प्रोजेक्ट के रूप में पहले ही कई राज्यों में चलाया जा रहा है।

जीरो बजट खेती (Zero Budget Farming) क्या है?

शून्य बजट एक प्राकृतिक खेती की प्रक्रिया है जिसमें की खेती करने के लिए किसानो के कर्ज के जाल से बहार निकाल कर आत्म निर्भर बनाया जा सके। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन के अनुसार शून्य बजट प्राकृतिक खेती कृषि विधियों का एक सेट है। इसे पहले से ही कर्नाटक के कृषक सुभाष पालेकर और किसान संघ द्वारा किसानों के कर्ज के जाल से निकालने के लिए शुरू किया गया था जिसमें किसानो को बीज का संग्रहण तथा प्राकृतिक उर्वरको का प्रयोग कर आत्म निर्भर बनाने में मदद करना है। इसमें रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं किया जाता है ।

अवधारणा 4 स्तंभों पर आधारित है

  • जीवामृत- मिट्टी में सूक्ष्मजीवों और केंचुओं की गतिविधि को बढ़ाने के तरीके
  • बीजामृत- बीज और अंकुर की रक्षा के लिए
  • Acchadana- मिट्टी की उर्वरता की रक्षा के लिए तीन प्रकार के शहतूत शामिल हैं
  • वापासा- सिंचाई पर निर्भरता से बचने के लिए मिट्टी में पानी बनाए रखने के तरीके

केंद्र सरकार के साथ साथ राज्य सरकारों के लिए भी कृषि ऋण बड़ी चिंता की बात है। अगर शून्य बजट खेती को सरकार लागु करे तो खेती में लगने वाली लगत बहुत काम हो जाएगी जिस से की किसानो को इसके लिए ऋण की आवस्यकता नहीं होगी और वे आत्म निर्भर बनेगे साथ ही प्राकृतिक खेती से उनके उत्पादन भी बढ़ेगा जिस से की किसानो की आय भी दुगनी होगी।

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साथ ही वित्य मंत्री सीतारमण ने भी अपने बजट भाषण में 75 वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में किसानों की आय को दोगुना करने का कहा है। पहले की कुछ राज्यों में इस की सुरुवात की जा चुकी है।

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