ओयो रूम्स और रितेश अग्रवाल

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ओयो रूम्स और रितेश अग्रवाल

OYO Rooms

ओयो रूम्स आज भारत के साथ साथ एशिया की भी एक बड़ी होटल चेन सीरीज (hospitality company) में से एक बन चुकी है साथ ही भारत की तीसरी सबसे बड़ी स्टार्टअप कंपनी बन चुकी है । ओयो रूम्स आज भारत के साथ साथ चीन, मलेशिया, नेपाल, इंडोनेशिया, यूएई, सऊदी अरब, जापान और ब्रिटेन में भी अपनी सर्विसेज दे रही है।

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ओयो रूम्स का आज जितना बड़ा नाम है उतना बड़ा नाम ओयो रूम्स के संस्थापक रितेश अग्रवाल का है। रितेश का लक्ष्य 2024 तक ओयो रूम्स को स्टार्टअप की दुनिया में सबसे बड़ी होटल चेन में बदलने का है।

अगर हम ओयो और रितेश की कहानी (story) की बात करे तो उनकी कहानी किसी काल्पनिक कहानी से कम नहीं लगती है क्यों की उन्होने इतनी कम उम्र में जो हासिल किया है वो अकल्पनीय है।

रितेश का जन्म उड़ीसा के बिसाम कटक में बिजनेस क्लास परिवार के लिए हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा उड़ीसा के रायगढ़ में सेक्रेड हार्ट स्कूल से हुई थी ।

वे उनके स्कूल वाले दिनों में पड़ने के अलग तरीको के लिए जाने जाते थे । उनका शुरू से ही कंप्यूटर में बड़ी रूचि थी, साथ ही वे नई नई जगह घूमने के भी शौकीन थे । कंप्यूटर में रूचि होने के कारण ही वे स्कूल दिनों में कंप्यूटर प्रोग्रामिंग किताबो के द्वारा पड़ने लगे थे। इसके लिए वे अपने बड़े भाई की किताबे उपयोग करते थे। बेसिक और पास्कल जैसी कंप्यूटर लैंग्वेज उन्होंने स्कूल में ही सीख ली थी। और दूसरी लगगे के लिए उन्होंने ऑनलाइन स्टडी मटेरियल का सहारा लिया ।

जब उनके कॉलेज में जाने का समय आया तो उनके माता पिता अन्य माता पिता की तरह ये चाहते थे की उनका बेटा भी अच्छे कॉलेज में पड़ कर अच्छी नौकरी करे। इसके लिए उन्हें IITJEE की एग्जाम की तैयारी करने कोटा भेजा गया उनका मन इंजीनिरिंग करने का नहीं था।

पर माता पिता की इक्षा के लिए वे वह गए पर जब ज्यादा ही मन नहीं लगा तो उन्होंने दिल्ली के इंडियन स्कूल बिजनेस एंड फाइनेंस में एडमीशन ले लिया।

पर उनका वहाँ पर भी ज्यादा मन नहीं लग रहा था क्यों की वे दुसरो से कुछ हट कर थे उन्हें लाखो की सैलरी पैकेज से कुछ बढ़ कर चाहिए था।
वे गूगल के बिलगेट्स , ओला के संस्थापक भावेश अग्रवाल से बहुत ज्यादा प्रभावित थे उन्होंने उनकी जीवनी कई बार पड़ी थी उनके कॉलेज ड्रॉपआउट कर अपना एक सफल स्टार्टअप शुरू कर सफलता हासिल करने की बात रितेश के दिल में घर कर गई और उन्होंने भी अपना स्टार्टअप शुरू करने का मन बना लिया था।

इस बीच वे पक्के मन से अपना स्टार्टअप सुरु करने के लिए अपनी फाइनेंस की पड़े को छोड़ दी और अपना खुद का स्टार्टअप ओरवाल सुरु किया । इसके लिए वे कड़ी मेहनत कर कही होटलो के चक्कर काटे और उन्होंने होटलो का सर्वे कर एक ऑनलाइन वेबसाइट बनाई जिस में लोग आसानी से किसी भी शहर में सस्ते और किफायती होटल सर्च कर सकते थे।

इस वेबसाइट से ऐसे लोगो को काफी फायदा मिला जो किसी नए शहर में जाते थे पर उन्हें वहाँ की होटल्स की इतनी जानकारी नहीं होती थी। इस में वे अपने बजट के अनुसार होटल का चुनाव कर सकते थे।

2013 में उन्होंने अपने स्टार्टअप का नाम बदल कर ओयो रूम्स (OYO Rooms) रख दिया । फिर उन्होंने दूसरे होटलो की लिस्टिंग के साथ अपनी खुद की होटलो की सीरीज़ भी सुरु की । एक समय ऐसा भी आया की वे एक मात्र उनकी कंपनी में कॉलेज ड्राप आउट थे और में IIT IIM जैसे संसथान के ग्रेजुएट पास टीम को लीड करते थे ।

वे कॉलेज ड्रॉपआउट्स को ख़फ़ी पसंद करते थे और उम्मीद करते है की उनकी टीम में भी काफी ड्रॉपआउट्स हो वे प्रतिभा साली ड्रॉपआउट्स की काफी कदर करते है तथा उन्हें प्रोत्साहित करते है ।

वे भी उनके शुरुआती दिनों में अमेरिका के आंत्रप्रोनर पीटर थिल ने ऐसे आंत्रप्रोनर को प्रोत्साहित करने के लिए एक स्कॉलरशिप प्रोग्राम चलाया था । उसमे रितेश ने भाग लिया था और वे जीते भी थे ।हाल ही में ओयो रूम्स ने सॉफ्टबैंक विज़न फण्ड और अन्य फंडिंग के जरिये 1 लाख अरब डॉलर की फंडिंग जुटाई है।

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