प्रधान मंत्री आवास योजना | Pradhan Mantri Awas Yojana In Hindi 2018-2019

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प्रधान मंत्री आवास योजना | Pradhan Mantri Awas Yojana In Hindi 2018-2019

प्रधान मंत्री आवास योजना 2019

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Pradhan mantri awas yojana 2019 in hindi

 

प्रधान मंत्री आवास योजना केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित एक बहु प्रतिष्ठित योजना है भारत सरकार ने इस योजना को हाउसिंग फॉर आल (Housing for All 2022 Scheme) के स्लोगन दिया है इसका मतलब सभी के लिए घर। इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत के उन 2 करोड़ लोगो को पक्का घर देना है, जो अपना खुद का पक्का घर बनाने या लेने में असमर्थ है। इस योजना को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 1 जून 2015को लांच किया गया था।इस योजना को को ३ चरणों में किया जायगा इस योजना का पहला चरण २०१५ से २०१७ तक चला जो की अभी ख़त्म हो चूका है अब इसका दूसरा चरण शुरू हो चूका है इस योजना को २०२२ तक तक सभी लोगो को घर देने के उद्देश्य से शुरू किया है इसका मतलब ये योजना २०२२ तक चलेगी भारत सरकार ने इस योजना को 2 भागो में बाटा गया था प्रधान मंत्री आवास योजना शहरी (PMAY-G) तथा प्रधान मंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-U)

1985 में तात्कालिक प्रधान ,मंत्री राजीव गांधी ने अपनी माँ इंदिरा गांधी के नाम पर इंदिरा आवास योजना शुरू की थी इसके तहत गरीबी रेखा से निचे जीवन यापन करने वाले लोगो को खुद का पक्का घर प्रधान करना था। प्रधान मंत्री आवास योजना भी उसी योजना का संसोधित रूप है इस योजना के दायरे में ज्यादा से ज्यादा लोगो को लिया है जिस से की अधिक से अधिक लोगो को इसका फायदा मिल सके

प्रधान मंत्री आवास योजना की विशेषताएं (Features of Pradhan Mantri Awas Yojana)


  • इस योजना का क्रियान्वयन करते समय सरकार ने पारदर्शिता का विशेष ध्यान रखा है जिस से की बिच में होने वाली घुस खोरी से बचा जा सके और आवेदन करता को इसका सम्पूर्ण लाभ मिल सके ।
  • प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत १ लाख २० हजार रूपए की सहायता राशि दी जाएगी जो की पहले 70,000 रूपए थी पर विषम परिश्थितियों तथा मगँगाई को देखते हुए बड़ाई गई है। पहले दुर्गम इलाकों और पहाड़ी छेत्रो में भी यह राशि 70,000 रूपए थी पर अब वह पर भी बड़ा के ऐसे 1 लाख 30 हजार रूपए किया गया है।
  • इस योजना के तहत मिलने वाली राशि और सब्सिडी राशि डायरेक्ट उम्मीदवार के बैंक खाते में आएगी जो को आधार कार्ड से लिंक होगा जिस से की उसे इसका सम्पूर्ण फायदा मिल सके|
  • प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले पक्के मकान 25 स्कार मीटर (लगभग 270 स्कार फिट) के होंगे जो की पहले से बड़ा दिए गए है पहले इनका आकर 20 स्कार मीटर (लगभग 215 स्कार फिट) तय किया गया था।
  • इस योजना में लगने वाला खर्चा केंद्र सरकार और राज्य सरकार के द्वारा मिलकर किया जायेगा । मैदानी क्षेत्रोँ में इस शेयर की जाने वाली राशि का अनुपात 60:40 होगा वहीं उत्तर-पूर्व और हिमालय वाले तीन राज्यों जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में यह अनुपात 90:10 होगा।
  • प्रधान मंत्री आवास योजना को स्वच्छ भारत योजना से भी जोड़ा गया है इसके अंतर्गत बनने वाले शौचले के लिए स्वच्छ भारत योजना के तहत 12,000 रूपए अलग से आवंटित किये जायेंगे।
  • इस योजना के तहत यदि लाभार्थी चाहे तो 70 हजार रुपय का लोन भी ले सकता है जो की बिना ब्याज के होगा जिस क़िस्त रूप में पुनः भरना होगा जो की उसे विभिन्न फाइनेंसियल इंस्टिट्यूट से अप्लाई करके लेना होगा। शहरी चैत्र में उम्मीदबार 70 हजार से अधिक लोन ले सकता है जो की बहुत ही काम ब्याज डरो पर उपलभ्ध होगा। लोन केटेगरी LIG, HIG, MIG केटेगरी के हिसाब से मिलेगी ।
  • लाभार्थी को संपूर्ण सुविधा जैसे टॉयलेट, पीने का पानी, बिजली, सफाई खाना बनाने के लिए धुआ रहित ईंधन, सोशल और तरल अपशिष्टो से निपटने के लिए इस योजना को अन्य योजनाओं से जोड़ा भी गया है.

प्रधान मंत्री आवास योजना के लिए योग्यता मानदंड (Eligibility Criteria for PMAY Scheme)


प्रधान मंत्री आवास योजना के लाभार्थियों की सूची की पहचान और चयन करने के लिए सरकार 2011 की एसोसिएशन इकोनॉमिक और जाति जनगणना (एसईसीसी 2011) का उपयोग करेगी। तहसील के साथ गांव पंचायतों को ग्रामीण आवास योजना के तहत सूची बनाने से पहले लाभार्थियों के परामर्श के लिए विचार किया जाएगा। जिस से की इस योजना की पारदर्शिता बानी रहे और ये सुनिचित किया जा सके की आवेदन करता इस योजना योग्य है या नहीं।

  • इस योजना के तहत ऐसे लोग आवेदन कर सकते है जिन के जो किराये के मकान में रहते है जिन के पास अपना माकन नहीं है या फिर कच्चा मकान है कच्चे मकान से आशय ऐसे मकान से है जिस की छत पक्की न हो। इसके लिए जरुरी नहीं है की वो गरीबी रेखा से निचे आये इसके लिए कोई भी जाती वर्ग का व्यक्ति आवेदन कर सकते है।
  • इसमें आवेदन करने के लिए परिवार का कोई भी सदस्य आवेदन कर सकता है बशर्ते उस परिवार के किसी भी सदस्य के पास भारत में कही भी कोई पक्का मकान न हो।
  • प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत प्रथम प्राथमिकता केटेगरी के अनुसार दी जाएगी, मतलब अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, माइनॉरिटीज और अन्य वर्ग के लोग इस योजना के तहत लाभ के प्रथम दावेदार होंगे|
  • ऐसे परिवार जिन में कोई भी बालिग न हो मतलब उस परिवार में कोई भी सदस्य की उम्र 16 से 59 के बीच न हो ऐसे परिवार को प्राथमिकता दी जाएगी।
  • ऐसा परिवार जिसकी मुखिया महिला हो उसे भी इस योजना में प्रधमिकता दी जाएगी ।
  • ऐसा परिवार जिस में कोई भी 25 वर्ष से बड़ा व्यक्ति पड़ा लिखा न हो ऐसे परिवारों को भी इस योजना में प्राथमिकता दी जाएगी ।
  • वह परिवार जिसका कोई सदस्य दिव्यांग हो और जिसमे कोई एडल्ट ना हो वह इस योजना के लिए प्राथमिकता होंगे
  • वह परिवार जिनके पास स्वयं की कोई जमीन उपलब्ध ना हो और जिनकी इनकम का अधिकतम भाग मजदूरी से आता हो वह इसके लिए प्राथमिकता होंगे.

आगे बढ़ने से पहले, यह समझना महत्वपूर्ण है कि पीएमए योजना में चार घटक हैं। वो हैं:

  • सीटूपुनर्वास में: यह उन नागरिकों के लिए लागू है जो झोपड़ियों से हैं।
  • लाभार्थी नेतृत्व निर्माण (बीएलसी): यह उन नागरिकों पर लागू होता है जिनके पास अपनी जमीन है और निर्माण / वृद्धि में रुचि रखते हैं।
  • क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (सीएलएसएस): नागरिक जो भूमि / घर खरीद सकते हैं या अपने मौजूदा घर को संशोधित कर सकते हैं, उन्हें क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना का चयन करना चाहिए। इस योजना के तहत, नागरिकों को गृह ऋण पर सब्सिडी मिलेगी।
  • साझेदारी में वहनीय आवास: यह मानदंड उन लोगों पर लागू होता है जिनके पास न तो घर बनाने के लिए कोई जमीन है और न ही वे गृह ऋण ले सकते हैं।

आवेदन चार श्रेणियों में से एक के तहत जमा किया जाना है।

प्रधान मंत्री आवास योजना कवरेज और अवधि


1. 500 श्रेणी-I शहरों  पर ध्यान केन्द्रित करने के साथ जनगणना 2011 के अनुसार सभी 4041 सां. विधिक कस्बों को तीन चरणों में कवर किया जाएगा जिनका ब्यौरा इस प्रकार हैः

चरण-I (अप्रैल, 2015 – मार्च, 2017)- राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों से उनकी इच्छुकता के अनुसार 100 शहरों  को कवर करने के लिए।

चरण-II (अप्रैल,2017 – मार्च, 2019)-अतिरिक्त 200 शहरों  को कवर करने के लिए।

चरण- III (अप्रैल,2019 – मार्च,2022) – सभी अन्य शेष शहरों को कवर करने के लिए।

तथापि, मंत्रालय को यदि राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों से संसाधन समर्थित मांग प्राप्त होती है, तो पहले के चरणों मे अतिरिक्त शहरों  को शामिल  करने के संबंध में नम्यता होगी।

2. यह मिशन बुनियादी सिविक अवस्थापना सहित 30 वर्ग मीटर के फर्शी क्षेत्रफल तक के आवासों के निर्माण में सहायता करेगा। राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को मंत्रालय से परामर्श  लेते हुए राज्य स्तर पर आवास के आकार और अन्य सुविधाओं का निर्धारण करने के संबंध में नम्यता होगी परन्तु यह केन्द्र से किसी बढ़ी हुई वित्तीय सहायता के बिना होगी । स्लम पुनर्विकास परियोजनाओं और भागीदारी में किफायती आवास परियोजनाओँ में जल, सफाई, सीवरेज, सड़क, बिजली इत्यादि जैसी बुनियादी सिविक अवस्थापना होनी चाहिए। शहरी  स्थानीय निकाय को यह सुनिश्चित  करना चाहिए कि ऋण से जुड़ी ब्याज सहायता और लाभार्थी आधारित निर्माण में इन बुनियादी सिविक सेवाओँ के लिए प्रावधान होना चाहिए।

3.प्रत्येक घटक के अंतर्गत इस मिशन के तहत निर्मित आवासों का न्यूनतम आकार राष्ट्रीय  भवन-संहिता (एनबीसी) में प्रदान किए गए मानकों के अनुरूप होना चाहिए। तथापि, यदि भूमि का उपलब्ध क्षेत्रफल एनबीसी के  अनुसार आवासों के ऐसे न्यूनतम आकार के  भवन-निर्माण की अनुमति न दे और यदि कम आकार के आवास के लिए लाभार्थी की सहमति उपलब्ध हो, तो एसएलएसएमसी के अनुमोदन से राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा क्षेत्रफल के संबंध में उपयुक्त निर्णय लिया जा सकता है। इस मिशन के अंतर्गत निर्मित अथवा विस्तारित सभी आवासों में अनिवार्य रूप से शौचालय की सुविधा होना चाहिए।

4. इस मिशन के अंतर्गत आवासों को राष्ट्रीय भवन संहिता और अन्य संगत भारतीय मानक ब्यूरों(बीआईएस) संहिताओं के अनुरूप  भूकम्प,  बाढ़,  चक्रवात,  भू-स्खलन  इत्यादि  के  लिए अवसंरचनात्मक सुरक्षा की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए तैयार और निर्मित किया जाना चाहिए।

5. इस मिशन के अंतर्गत केन्द्रीय सहायता से निर्मित/अधिग्रहण किए गए आवास, परिवार की महिला मुखिया अथवा परिवार के पुरुष  मुखिया और उसकी पत्नी के संयुक्त नाम में होना चाहिए और केवल उन मामलों में, जब परिवार में कोई वयस्क महिला सदस्य नहीं हो, आवास को परिवार के पुरुष  सदस्य के नाम में किया जा सकता है।

6. राज्य/संघ राज्य क्षेत्र सरकार और कार्यान्वयन एजेंसियों को इस मिशन के अंतर्गत निर्मित किए जा रहे आवासों के रख-रखाव की देख-रेख करने के लिए आवासी कल्याण संघ इत्यादि जैसा स्कीम के अंतर्गत लाभार्थियों के संघ बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

प्रधान मंत्री आवास योजना कार्यान्वयन


इस मिशन को लाभार्थियों, शहरी  स्थानीय निकायों और राज्य सरकारों को विकल्प देते हुए चार विकल्पों के माध्यम से क्रियान्वित किया जाएगा। ये चार विकल्प इस प्रकार हैं

1. स्व-स्थाने स्लम पुनर्विकास

  • संसाधन के रूप में भूमि का उपयोग
  • निजी भागीदारी और लोक प्राधिकरण के द्वारा
  • अतिरिक्त एफएसाई/टीडीआर/एफएआर परियोजनाओं को वित्तीय व्यवहार्य बनाने के लिए यदि अपेक्षित हो।

2. क्रेडिट से जुड़ी सब्सिडी के माध्यम से किफायती आवास

  • नए आवास और आवासों के विस्तार के लिए ईडबल्यूएस और एलआईजी हेतु सब्सिडी
  • ईडबल्यूएस: वार्षिक पारिवारिक आय 03 लाख रुपये तक और आवास का आकार 30 वर्ग मीटर तक।
  • एलआईजी: वार्षिक पारिवारिक आय 03-06 लाख रुपये तक और आवास का आकार 60 वर्ग मीटर तक।

3. भागीदारी में किफायती आवास

  • पैरास्टेटल एजेंसीयों सहित निजी अथवा  सार्वजनिक क्षेत्र के साथ
  • किफायती आवासीय परियोजनाओं में जहाँ 35% निर्मित आवास ईडबल्यूएस श्रेणी के लिए है,प्रति ईडबल्यूएस केन्द्रीय सहायता।

4. लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास निर्माण के लिए सब्सिडी

  • व्यक्तिगत आवास की आपेक्षा वाले ईडबल्यूएस श्रेणी के व्यक्तियों के लिए
  • राज्य के ऐसे लाभार्थियों के लिए पृथक योजना तैयार करनी है
  • अलग अलग/छितरे हुए लाभार्थी को शामिल नहीं किया जायेगा

Pradhan Mantri Awas Yojana Application Status


अपने प्रधान मंत्री आवास योजना आवेदन को ट्रैक करने के लिए, निम्नलिखित चरणों का पालन करने के लिए निम्नलिखित कदम हैं:

  1. http://pmaymis.gov.in/ पर आधिकारिक पीएमए वेबसाइट पर जाएं
  2. ‘नागरिक आकलन’ विकल्प का चयन करें
  3. इसके तहत, ‘अपनी आकलन स्थिति ट्रैक करें’ का चयन करें
  4. विकल्प चुनने पर, आपको उस पृष्ठ पर निर्देशित किया जाएगा जो ‘ट्रैक आकलन फॉर्म’ कहता है
  5. यहां, आपको दो विकल्पों में से एक चुनना होगा जिसके माध्यम से आप अपनी स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं।

आप या तो अपना नाम, अपने पिता का नाम और आईडी प्रकार दर्ज कर सकते हैं

या

आप बस आकलन आईडी दर्ज कर सकते हैं।

विकल्प 1:

पीएमए आवेदन स्थिति ट्रैक करें – नाम से, पिता का नाम और आईडी प्रकार

  • यदि आप पहला विकल्प चुनते हैं, तो आपको राज्य का नाम, जिला नाम, शहर का नाम, अपना नाम, पिता का नाम, मोबाइल नंबर जैसे विवरण दर्ज करना होगा और आईडी प्रकार का चयन करना होगा।
  • यदि आप आधार चुनते हैं, तो आपका आधार संख्या दर्ज की जानी चाहिए।
  • यदि आप कोई अन्य आईडी चुनते हैं, जैसे ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, एट कैटर, तो आपको संबंधित आईडी नंबर दर्ज करना होगा।
  • जानकारी सफलतापूर्वक सबमिट करने के बाद, आपके पीएमए आवेदन की स्थिति प्रदर्शित की जाएगी।

विकल्प 2:

पीएमए आवेदन स्थिति ट्रैक करें – आकलन आईडी द्वारा

यह विकल्प अपेक्षाकृत सरल प्रतीत हो सकता है क्योंकि आपको यहां प्रवेश करने की आवश्यकता है, यह आपकी मूल्यांकन आईडी और मोबाइल नंबर है। जानकारी दर्ज करने के बाद, आपको एक ऐसे पृष्ठ पर निर्देशित किया जाएगा जो आपके मूल्यांकन की स्थिति प्रदर्शित करेगा।

प्रधान मंत्री आवास योजना पुनर्विकास


पात्र स्लम वासियों को आवास प्रदान करने के लिए निजी सहभागिता से संसाधन के रूप में भूमि का उपयोग करते हुए स्वस्थाने स्लम पुनर्वास सभी के लिए आवास मिशन का एक महत्वपूर्ण घटक है। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य  पात्र स्लमवासियों को औपचारिक शहरी  व्यवस्थापना में लाते हुए उनको आवास प्रदान करने के लिए स्लमों के अंतर्गत भूमि की लॉक्ड क्षमता को बढ़ाना है।

  1. स्लम, चाहे वे केन्द्र सरकार की भूमि/राज्य  सरकार की भूमि/शहरी  स्थानीय निकाय की भूमि, निजी भूमि पर हों, को सभी पात्र स्लम वासियों को आवास प्रदान करने के लिए स्व स्थाने  पुनर्विकास के लिए लिया जाना चाहिए। ऐसे पुनर्विकसित स्लमों की अधिसूचना को अनिवार्य रूप से रद्द किया जाना चाहिए।
  2. स्लम पुनर्विकास के लिए निजी भागीदार का चयन खुली बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया जायेगा। राज्य सरकारें और नगर, स्लम पुनर्विकास परियोजनाओं को वित्तीय रूप से  व्यवहार्य  बनाने के लिए अतिरिक्त फर्शी क्षेत्र अनुपात (एफएआर)/फ्लोर  स्पेस इनडैक्स (एफएसआई) हस्तांतरण विकास अधिकार (टीडीआर) यदि अपेक्षित हुआ, प्रदान करेंगे। ऐसी सभी परियोजनाओं में पात्र स्लम वासियों के लिए सभी निर्मित आवासों के लिए एक लाख रूपया प्रति आवास, औसतन, का स्लम पुनर्वास अनुदान स्वीकार्य होगा। राज्यों/संघ शासित प्रदेशों  को यह छूट प्राप्त होगी कि वे केन्द्रीय अनुदान को निजी भागीदारी, निजी भूमि पर स्लमों को छोड़कर, से पात्र स्लम वासियों के आवास प्रदान करने के लिए पुनर्विकसित किये जा रहे अन्य स्लमों में लगा सकते हैं। इसका अर्थ यह है कि, राज्य/संघ राज्य प्रदेश कुछ परियोजनाओं में प्रत्येक आवास के लिए 1 लाख रू0 प्रति आवास से भी अधिक और अन्य परियोजनाओं में कम, का उपयोग कर सकते हैं परन्तु यह राज्य/संघ  शासित  प्रदेश  में परिकलित औसतन 1 लाख रू. प्रति आवास के भीतर ही रहेगा।
  3. ऐसी स्लम पुनर्विकास परियोजनाओं के लिए प्रति आवास अधिकतम केन्द्रीय सहायता, यदि कोई

हो, मंत्रालय द्वारा निर्धारित की जायेगी।

  1. पात्र स्लमवासियों को आवास प्रदान करने के लिए निजी स्वामित्व की भूमियों पर स्लमों के स्व स्थाने  पुनर्विकास को राज्य सरकारें/संघ शासित  प्रदेश  अथवा यूएलबी अपनी नीति के अनुसार भू-स्वामियों को अतिरिक्त एफएसआई/एफएआर अथवा टीडीआर देकर प्रोत्साहित कर सकते हैं। ऐसे मामलों में केन्द्रीय सहायता उपयोग नहीं किया जा सकता है।
  2. स्लम पुनर्विकास परियोजना में लाभार्थी योगदान, यदि कोई हो, संबंधी निर्णय और निर्धारण राज्य/यूटी सरकार द्वारा किया जाना चाहिए।
  3. पात्र स्लमवासियों, की निर्धारित तारीख आदि जैसी  पात्रताओं  का  निर्णय  राज्य/यूटी  द्वारा अधिमानतः विधान के द्वारा किया जायेगा ।
  4. राज्य/यूटी यह निर्णय लेंगे कि क्या निर्मित आवास मालिकाना अधिकार पर आवंटित किए जाएंगे

या पट्टा अधिकार पर । पट्टा अधिकार नवीकरणीय, बंधकयोग्य और उत्तराधिकार योग्य होने चाहिए। राज्य/यूटी इस संघटक के अंतर्गत निर्मित आवासों के हस्तांतरण पर उपयुक्त प्रतिबंध लगा सकते हैं।

निजी भागीदारी से स्लम पुनर्वास हेतु दृष्टिकोण की रूपरेखा नीचे दी गई है:-

  1. पहले कदम के रूप में, शहर  की सभी के लिए आवास कार्य योजना (एचएफएपीओए) में चिन्हित किए गए सभी मान्य स्लमों का उनकी अवस्थिति, उस स्लम में पात्र स्लमवासियों की संखया (देखें 4.6), स्लम भूमि का क्षेत्रफल, भूमि की बाजार संभावना (रेडिरेक्नर के अनुसार भूमि का मूल्य का उपयोग किया जा सकता है), उपलब्ध एफएआर/एफएसआई और उस भू-खंड पर लागू घनत्त्व मानदण्ड आदि के संदर्भ से विश्लेषण  किया जाना चाहिए।
  2. स्लमों के विश्लेषण  के आधार पर, कार्यान्वयन प्राधिकारियों को यह निर्णय लेना चाहिए कि क्या एक विशिष्ट स्लम का भूमि का एक संसाधन के रूप में प्रयोग करके निजी भागीदारी से पुनर्विकास किया जा सकता है अथवा नहीं और पात्र स्लम वासियों को आवास प्रदान किया जा सकता है । कुछेक मामलों में, परियोजनाओं को वित्तीय रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए राज्यों और शहरों  को अतिरिक्त एफएआर/एफएसआई अथवा टीडीआर देना होगा तथा घनत्व और अन्य आयोजना मानदण्डों को शिथिल  करना होगा। राज्य/यूटी भूमि/एफएआर के कुछ भाग की भूमि के मिश्रित उपयोग के रूप में वाणिज्यिक उपयोग की भी अनुमति दे सकते हैं।
  3. राज्य/यूएलबी स्वस्थाने पुनर्विकास को वित्तीय और तकनीकी रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए निकटवर्ती स्लमों को एक समूह में इक्ठ्‌ठा भी कर सकते हैं। स्लमों के ऐसे समूह को एक एकल परियोजना समझा जायेगा।
  4. एक व्यवहारिक स्लम पुनर्वास परियोजना के दो संघटक होंगे अर्थात स्लम पुनर्वास संघटक जो पात्र स्लम वासियों को बुनियादी सिविक अवसंरचना के साथ आवास प्रदान करता है और दूसरा  मुक्त बिक्री संघटक जो विकासकों को बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध होगा ताकि परियोजना को क्रास सब्सिडी दी जा सके।
  5. परियोजना बनाते समय, परियोजना नियोजन और कार्यान्वयन प्राधिकारियों को यह निर्णय भी करना चाहिए कि स्लम भूमि का कितना क्षेत्र निजी विकासकों को दिया जाना चाहिए। कुछेक मामलों में, स्लम का क्षेत्र सभी पात्र स्लमवासियों का पुनर्वास करने और परियोजना में क्रास सब्सिडी प्रदान करने के लिए मुक्त बिक्री संघटक के पश्चात्  भी बचा रहता है। ऐसे मामलों में परियोजना नियोजन प्राधिकारी को निजी विकासकों को अपेक्षित स्लम भूमि ही दी जानी चाहिए और शेष स्लम भूमि को अन्य स्लमों मे रहने वाले स्लमवासियों  के पुनर्वास के लिए या अन्य शहरी  गरीबों के आवास के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए।
  6. पुनर्विकास परियोजनाएं बनाते समय, विशेषकर  स्लम पुनर्विकास संघटक की रूपरेखा के प्रयोजन  से स्लमवासियों से उनकी संस्थाओं के माध्यम से अथवा अन्य उपयुक्त साधनों से परामर्श  करना चाहिए।
  7. निजी विकासकों, जो स्लम पुनर्विकास परियोजना को निष्पादित  करेंगे, का चयन खुली पारदर्शी  बोली प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए। भावी विकासकों के लिए पात्रता मानदंड का निर्णय राज्य/यूटी/यूएलबी द्वारा लिया जा सकता है। भावी विकासकों का कार्यक्षेत्र कार्यान्वयन एजेंसी द्वारा अपने वित्तीय और तकनीकी स्रोतों का प्रयोग करते हुए सौंपी गई परियोजना की संकल्पना और निष्पादन होना चाहिए। निर्माण अवधि के दौरान पात्र स्लमवासियों को ट्रांजिट आवास प्रदान कराना परियोजना विकासकर्ताओं का उत्तरदायित्व होगा।
  8. सभी वित्तीय और गैर-वित्तीय प्रोत्साहन और रियायतें, यदि कोई हों, परियोजना में एकीकृत की जानी चाहिए और बोली दस्तावेजों में एक प्राथमिकता घोषित की जानी चाहिए। इन प्रोत्साहनों और रियायतों में लाभार्थियों/स्लमवासियों से योगदान, यदि कोई हों, शामिल  किया जाना चाहिए।
  9. परियोजना के मुक्त बिक्री संघटक की बिक्री  को सम्पूर्णता और कार्यान्वयन एजेंसी/राज्य को स्लम पुनर्वास संघटक के अंतरण के साथ सम्बद्ध किया जाना चाहिए। किसी पेचीदगी से बचने के लिए ऐसी शर्तों  का बोली दस्तावेजों में स्पष्ट उल्लेख किया जाना चाहिए।
  10. स्लम पुनर्वास घटक को कार्यान्वयन एजेंसी को सौपा जाना चाहिए ताकि पात्र स्लम वासियों को एक  पारदर्शी  प्रक्रिया के माध्यम से आवंटन किए जा सकें। आवंटन करते समय, शारीरिक  रूप से विकलांग व्यक्तियों वाले परिवारों और वरिष्ठ नागरिकों को भू-तल अथवा नीचे की मंजिलों पर आवंटन हेतु प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
  11. स्लम पुनर्विकास परियोजना के लिए खुली बोली से सकारात्मक प्रीमियम अथवा नकारात्मक प्रीमियम प्राप्त हो सकता है। सकारात्मक प्रीमियम के मामले में, विकासकर्ता, जो सभी अन्य शर्तों  को पूरा करते हुए उच्चतम सकारात्मक प्रीमियम प्रस्तुत करता है, का चयन  किया जाना चाहिए। नकारात्मक प्रीमियम के मामले में, कार्यान्वयन प्राधिकरण निम्नतम नकारात्मक प्रीमियम का प्रस्ताव करने वाले बोलीकर्ता का चयन कर सकता है। इस परियोजना को व्यवहार्य बनाने के लिए अपेक्षित धन राशि  केन्द्र सरकार के स्लम पुनर्वास अनुदान अथवा राज्योंध्द्गाहरी स्थानीय निकायों की अपनी निधियों तथा अन्य  परियोजनाओं  से  प्राप्त सकारात्मक प्रीमियम से उपलब्ध करायी जा सकती है। ऐसी निजी सहभागिता, जो सरकार से भारी अनुदान की मांग  करें, को प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए। स्लमों को विकास के लिए या तो बाद में लिया जा सकता है अथवा स्लमों में कच्चे/अप्रयोज्य आवासों को मिशन के किसी अन्य संघटक के अन्तर्गत लिया जा सकता है।
  12. राज्य आयोजना और कार्यान्वयन प्राधिकरण, यूएलबी का स्लम पुनर्विकास परियोजना के लिए एकल परियोजना खाता होना चाहिए जहां सकारात्मक प्रीमियम केन्द्र सरकार से स्लम पुनर्वास अनुदान, राज्य सरकार अथवा किसी अन्य स्रोत से निधियों को जमा कराया जा सके और उन्हें नकारात्मक प्रीमियम वाली सभी स्लम पुनर्वास परियोजनाओं के वित्तपोषण  के लिए उपयोग में लाया जा सके। ऐसे खाते शहर-वार खोले जा सकते हैं।
  13. स्लम पुनर्वास परियोजनाओं के लिए राज्य/यूटी में प्रचलित नियमों और कार्यविधियों के अनुसार विभिन्न एजेंसियो से कई अनुमोदनों की जरूरत पड़ेगी। परियोजना विकास के लिए विभिन्न विकास नियंत्रण नियमों में परिवर्तनों की अपेक्षा भी हो सकती है। ऐसे परिवर्तनों को सुविधाजनक बनाने और परियोजनाओं को शीघ्र बनाने तथा अनुमोदन के लिए यह सुझाव दिया जाता है कि एक एकल प्राधिकरण का गठन किया जाए। जिसे परियोजनाओं की आयोजन  और अन्य मानदण्डों में परिवर्तन करने और अनुमोदन देने का उत्तरदायित्व दिया जा सके।

प्रधान मंत्री आवास लोन सब्सिडी योजना


मिशन में शहरी  गरीबों की आवास की जरूरतों के लिए संस्थागत ऋण प्रवाह को बढाने के लिए मॉंग पक्ष व्यवस्था के रूप में ऋण आधारित ब्याज सब्सिडी घटक का कार्यान्वयन किया जाएगा । पात्र शहरी  गरीबों (ईडब्ल्यूएस/एलआईजी) द्वारा अधिग्रहण, आवास के निर्माण के लिए, लिए गए गृह ऋण पर ऋण आधारित सब्सिडी दी जाएगी ।

  1. आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) और निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के लाभार्थी जो बैंकों, आवास वित्त कंपनियों और अन्य ऐसे संस्थाओं से गृह ऋण की मॉंग कर रहे हैं, वे 6.5% की दर पर 15 वर्षों  की अवधि के लिए अथवा ऋण अवधि के दौरान, इसमें से जो कम हो, के लिए ब्याज सब्सिडी के लिए पात्र होंगे । ब्याज सब्सिडी का निवल वर्तमान मूल्य (एनपीबी) की 9% की छूट दर पर गणना की जाएगी ।
  2. ऋण आधारित सब्सिडी केवल 6 लाख रू. तक की ऋण राशि  के लिए उपलब्ध होगी और 6 लाखरू. से अधिक का ऋण गैर सब्सिडीकृत दर पर होगा। ब्याज सब्सिडी ऋणदाता संस्थाओं के माध्यम से लाभार्थियों के ऋण खाते में अग्रिम रूप से जमा कर दी जाएगी, इससे प्रभावी आवास ऋण और समान मासिक किस्त (ईएमआई) में कमी आएगी ।
  3. ऋण आधारित सब्सिडी विस्तारणीय आवास के रूप में मौजूदा आवासों के लिए नए निर्माण और कमरों का विस्तार, रसोई, शौचालय आदि हेतु उपलब्ध आवास ऋणों के लिए उपलब्ध होगी ।
  4. आवास और शहरी  विकास कारपोरेशन (हुडको) और राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी) को ऋणदाता संस्थाओं को इस सब्सिडी का वितरण और इस घटक की प्रगति की निगरानी करने के लिए केन्द्रीय नॉडल एजेंसियों (सीएनए) के रूप में निर्धारित किया गया है । मंत्रालय भविष्य  में अन्य संस्थाओं को सीएनए के रूप में अधिसूचित कर सकता है ।
  5. प्राथमिक ऋणदाता संस्था (पीएलआई) अनुलग्नक-1 में दिये गए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करके केवल एक सीएनए के साथ पंजीकरण कर सकता है ।
  6. सीएनए स्कीम की उचित कार्यान्वयन और निगरानी सुनिश्चित  करेंगी और इस उद्देश्य  के लिए उचित तंत्र को अपनाएंगी । सीएनए आवास और शहरी  गरीबी उपशमन मंत्रालय को अनुलग्नक-2 के अनुसार नियमित मासिक और तिमाही रिपोर्टों के माध्यम से आवधिक निगरानी सूचना मुहैया करेंगी ।
  7. राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र/शहरी स्थानीय निकाय/प्रथम ऋणदाता संस्थाएं दोहराव से बचने के लिए लाभार्थी पहचान को आधार, मतदाता पहचान पत्र, किसी अन्य विशिष्ट पहचान अथवा लाभार्थी के पैतृक जिले के राजस्व प्राधिकारी से जारी आवास स्वामित्व प्रमाण-पत्र से जोड़ेंगे ।
  8. स्कीम के अन्तर्गत हाथ से मैला ढ़ोने वाले, महिलाओं (विधवाओं को  वरीयता  दी  जाएगी), अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछडे वर्गों के व्यक्तियों, अल्पसंखयकों, विकलांगों और उभयलिंगी को वरीयता दी जानी चाहिए बर्शते कि  लाभार्थी  ईडब्ल्यूएस/एलआईजी  वर्गों  से संबंधित हो ।
  9. मिशन के कार्यान्वयन हेतु राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र द्वारा निर्धारित राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी(एसएलएनए) पहचाने गए पात्र लाभार्थियों को ऋण आधारित सब्सिडी उपलब्ध कराने होते हेतु अनुमोदन और दस्तावेजों आदि को प्राप्त करने में मदद करेगी।
  10. स्कीम के अंतर्गत ईडब्ल्यूएस अथवा एलआईजी लाभार्थी के रूप में पहचान के लिए व्यक्तिगत ऋण आवेदक को आय प्रमाण के रूप में स्व-प्रमाण पत्र / शपथ  पत्र प्रस्तुत करना होगा ।
  11. यदि किसी ऋणी ने स्कीम के अंतर्गत एक आवास ऋण लिया है और ब्याज सहायता प्राप्त की है, लेकिन बाद में शेष अंतरण के लिए अन्य पीएलआई में परिवर्तन किया जाता है तो, ऐसे लाभार्थी पात्र नहीं होंगे अथवा फिर से ब्याज सहायता के लाभ का दावा नहीं कर सकेंगे।
  12. मिशन के अंतर्गत लाभार्थी केवल एक घटक के तहत ही लाभ उठा सकता है । चूँकि अन्य तीन घटक, राज्य सरकार द्वारा शहरी  स्थानीय निकायों/प्रधिकरणों आदि के माध्यम से कार्यान्वित किए जाने हैं, और ये घटक पीएलआई द्वारा कार्यान्वित किए जाने हैं, इसलिए कि लाभार्थी एक से अधिक घटक से लाभ नहीं उठाए, ऋण आधारित सब्सिडी के अंतर्गत लाभ दिये जाने वाले लाभार्थियों की सूची बनाने के लिए पीएलआई को राज्य/संघ  राज्य क्षेत्र सरकारों अथवा राज्य/संघ राज्य क्षेत्र सरकार की निर्दिष्ट  एजेंसी से तिमाही अनापत्ति प्रमाण-पत्र लेना चाहिए । इस प्रक्रिया को सक्षम बनाने के लिए लाभार्थियों को अपने आधार संखया/मतदाता पहचान-पत्र/अन्य किसी विशिष्ट पहचान संखया अथवा लाभार्थी के पैतृक जिले के राजस्व प्राधिकारी से जारी आवास स्वामित्व प्रमाण-पत्र से जुडना चाहिए और राज्य/संघ  राज्य सरकार अथवा उसकी निर्दिष्ट एजेंसी को ऐसे अनुरोध की प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना चाहिए।

प्रधान मंत्री आवास योजना (पीएमएई) टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर


किसी भी प्रश्न के मामले में, आप हमेशा आधिकारिक वेबसाइट पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न अनुभाग पर जा सकते हैं। सीएलएसएस से संबंधित संदेहों के लिए, आप अपने संबंधित टोल-फ्री नंबरों पर नेशनल हाउसिंग बैंक (एनएचबी) या आवास और शहरी विकास निगम (हुडको) से संपर्क कर सकते हैं।

  • एनएचबी – 1800-11-3377, 1800-11-3388
  • हुडको – 1800-11-6163

आप अपने जिले के नगर पालिका अधिकारी से भी संपर्क कर सकते हैं, जो प्रधान मंत्री आवास योजना (शहरी) के प्रभारी हैं।

 

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2 Responses

  1. Lakshman Bahadur Pradhan says:

    My Self Lakshman Bahadur Pradhan, I have already registerd for Pradhan Mantri Awas Jojna but till date I have not yet received any Home.
    How can and where I contact for solve the problem

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