किसान क्रेडिट कार्ड कैसे करे आवेदन

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आज भारत के बहुत से किसान, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का फायदा ले रहे है, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) भारत सरकार की किसानो के लिए एक बहुत अच्छी पहल है जिससे की देश के किसानों को अपनी खेती के लिए सस्ती दर पर ऋण उपलब्ध हो सके। किसान क्रेडिट कार्ड योजना अगस्त 1998 में कृषि कल्याण विभाग ने एक विशेष समिति के प्रस्ताव के बाद शुरू की गई थी। केसीसी अकाउंट को किसान क्रेडिट कार्ड ऋण के रूप में भी जाना जाता है। किसान क्रेडिट कार्ड में किसानों को खेती, फसल और खेत के रखरखाव के लिए टर्म लोन प्रदान करता है। आज हम किसान क्रेडिट कार्ड के बारे में बात करेंगे और जानेंगे की किसान क्रेडिट कार्ड ऋण कैसे काम करता है और इसके लाभ क्या है।

किसान क्रेडिट कार्ड योजना का उद्देश्य

किसान क्रेडिट कार्ड योजना का मुख्य उद्देश्य किसानो को अपनी खेती की जरूरतों को पूरा करने के लिए स्वाभलम्भी बनाना है, पहले उन्हें गैर-संस्थागत ऋण स्रोतों पर से निर्भर रहना पड़ता था जैसे की बीज, कीटनाशक, उर्वरक, आदि खरीदने के लिए । और गैर-संस्थागत ऋण पर बहुत ज्यादा ब्याज दर होने से किसान ऐसे गैर-संस्थागत ऋण बाटने वालो के कर्ज के तले हमेसा दबे रहते थे। और कुछ एक बैंकों या अन्य सरकारी वित्तीय संस्थानों में कर्ज का प्रावधान था वह की लंबी और बोझिल प्रक्रियाएं थीं। जिस से किसान उस का फायदा नहीं ले पाते थे।

असंगठित ऋण बाजार के शोषण तथा अत्यधिक ब्याज दरों से किसान समुदाय लगातार कर्ज में डूबा रहा। इसलिए, किसानों को पर्याप्त परेशानी, समय पर और लागत प्रभावी धन की उपलब्धता की गारंटी देने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड योजना शुरू की गई।

किसान क्रेडिट कार्ड ऋण की लाभ

  • किसान क्रेडिट कार्ड योजना में सभी किसान छोटा हो या बड़ा लाभ के पात्र होंगे इसमें ऐसे किसान भी शामिल है जो मुनाफे (किराये) पर जमीन ले कर खेती करते है।
  • राष्ट्रीय फसल बीमा योजना में केसीसी के लिए पात्र फसलें शामिल हैं। यह योजना किसानों को खराब फसल के मौसम में कुछ सुरक्षा प्रदान करती है।
  • किसान क्रेडिट कार्ड योजना को सरल बनाने के लिए इसमें होने वाली कागजी कार्रवाई बहुत ही न्यूनतम तथा सरल रखा गया।
  • किसान क्रेडिट कार्ड पर लिए गए ऋण को वापस करने का प्रॉसेस बहुत ही आसान है साथ ही ऋण वापसी की प्रक्रिया बहुत ही लचीली है जिस से किसानो के लिए और भी फायदेमंद हो जाती है। प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में पुनर्भुगतान अवधि को बढ़ाये जाने का प्रावधान भी है ।
  • सरकार सारी सरकारी बैंक तथा संस्थाओ को सस्ती ब्याज दरों ऋण उपलब्धता सुनिश्चित करता है।
  • यह किसान क्रेडिट कार्ड के प्राप्तकर्ता के लिए बीमा कवरेज (व्यक्तिगत दुर्घटना और संपत्ति) प्रदान करता है।
  • यह किसान की आवश्यकताओं के अनुसार नकदी निकालने की सुविधा प्रदान करता है।

इस योजना के तहत किसानो का बैंक में किसान क्रेडिट कार्ड के तहत अकाउंट खुलवाया जाता है और इसके साथ उन्हें एक प्लास्टिक मनी मतलब एक क्रेडिट कार्ड दिया जाता है जिस से की की वे जरुरत होने पर पैसे भी निकल सकते है।

जब केसीसी को शुरू हुई थी तब इसमें सिर्फ कृषि में होने वाले खर्चो को को ही पूरा किया जाता था पर बाद में इसकी सीमा बड़के इसका विस्तार किया गया और इसके पैसो का अन्य संबधित खर्चों के लिए भी कर सकते हैं।

केसीसी ऋण की मात्रा – किसान क्रेडिट कार्ड में मिलने वाले ऋण की मात्रा किसान की खेती की जमीन का क्षेत्र, उस पर लगाई जाने वाली फसल, किसानी की कमाई आदि पर निर्भर करता है और आप के द्वारा समय पर लौटाए गए ऋण पर भी इसकी सिमा समय के अनुसार बढ़ती रहती है।

केसीसी जमानत की सुरक्षा –किसान क्रेडिट कार्ड ऋण पर जमानत के लिए आरबीआई व्यापक दिशा-निर्देश तय किए गए हैं और समय समय पर इन नियमो को संसोधित भी किया जाता है। पर बैंक व वित्यीय संस्थान अपने अनुसार भी अपने अनुसार नियमो में संसोधन कर सकती है।

केसीसी ब्याज की दर – किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) पर लगने वाली ब्याज दरे बैंक व वित्तीय संस्थान के ऊपर निर्भर करती है पर इसके लिए आरबीआई के भी दिशा निर्देश है और आरबीआई इस पर निगरानी भी रखता है। ऋण पर ब्याज के अलावा, कुछ अन्य अतिरिक्त शुल्क योजना में शामिल हैं। इनमें प्रोसेसिंग फीस, बीमा प्रीमियम आदि शामिल हैं। हालांकि, कई मामलों में कर्ज देने वाले संस्थान किसानों के हितों के लिए इन शुल्कों को माफ कर देते हैं।

केसीसी चुकौती अवधि –किसान क्रेडिट कार्ड ऋण वापसी की अवधि बैंक या वित्तीय संस्थान द्वारा निर्धारित की जाती है जो की हमेसा फसल उत्पादन के बाद ही होती है। अल्पकालिक ऋण के लिए, वे आमतौर पर फसलों की कटाई और विपणन अवधि को ध्यान में रखते हैं। दीर्घावधि ऋण आम तौर पर संवितरण के पांच वर्षों के भीतर चुकाने योग्य होते हैं।

किसान क्रेडिट कार्ड ऋण की पेशकश करने वाले संस्थान

1. भारतीय स्टेट बैंक (SBI)
2. बैंक ऑफ इंडिया (BOI)
3. भारतीय औद्योगिक विकास बैंक (IDBI)
4. नाबार्ड
5. भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI)

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