how to choose fix deposite
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फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) भारत में निवेश का सबसे सुरक्षित और सबसे विश्वसनीय साधन है इसमें लोग बिना किसी मार्किट रिस्क के पैसा लगा सकते है इसमें आप को एक फिक्स्ड रिटर्न प्राप्त होता है। चुकी 2018 म्यूचुअल फंड, इक्विटी और रियल एस्टेट में बहुत उतार चढ़ाव भरा रहा है जिस में मार्केट लिंक किसी भी निवेश पर नेगेटिव रिटर्न ही मिला है डेट फंडों ने कम रिटर्न भी हासिल किया है इस कारण 2018 में फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाला संसाधन रहा।

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फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की ब्याज दर मूल्य और आयु वर्ग के अनुसार अलग अलग होती है –

हर एक बैंक के अनुसार तो बदलती ही है ये फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में जमा की जाने वाली राशि और जमा करने वाले की उम्र के अनुसार भी अलग अलग हो सकती है रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के नियम के अनुसार सीनियर सिटीजन की ब्याज दरे सामान्य उम्र के लोगो से कुछ अलग होती है अर्थात उनसे कुछ प्रतिसत ज्यादा होती है साथ ही।

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जैसे की सामन्य एफडी के ब्याज दरे 5 से 9 प्रतिसत में के बीच हर महीने आरबीआई द्वारा बदली जाती है जो की मार्केट की लिक्विडिटी पर निर्भर करती है पर जो लोग 60 वर्ष से ऊपर है उनके लिए ब्याज दरे .5% ज्याद होती है साथ ही वूयज दरे फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में जमा की गए मूल्य पर भी निर्भर करती है जैसे ज्यादा मूल्य की एफडी की दरे ज्यादा होती है जबकि छोटी मूल्य की एफडी की व्याज दरे काम मूल्य की होती है।

एफडी करने वाली बैंक की क्रेडिबिलिटी

फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की व्याज दरे बैंक की क्रेडिबिलिटी पर भी निर्भर करती है राष्ट्रिकिरित बैंको में एफडी की ब्याज दरे तुलनात्मक काम होती है पर ऐसा नहीं है की राष्ट्रिकिरित बैंक डिफॉल्टेर नहीं हो सकती पर DICGC के अंतर्गत हर एक एफडी का इन्शुरन्स होता है अगर बैंक डिफॉल्टेर होती है तो इन्शुरन्स कम्पनी 1 लाख तक का भुक्तं करती है पर कम क्रेडिबिलिटी वाली बैंक ये सुविधा नहीं देती पर राष्ट्रिकिरित बैंको से इसकी ब्याज दरे .5 से 1 प्रतिसत तक ज्यादा होती है जैसे महिंद्रा फाइनेंस की व्याज दरे 9 से 9.75% तक है जो की राष्ट्रिकिरित बैंक से ज्यादा है।

संचयी तथा गैर-संचयी एफडी

अलग अलग बैंको में एफडी पर मिलने वाले व्याज का तरीका भी अलग अलग हो सकता है जैसे कुछ बैंक संचयी तथा गैर-संचयी एफडी प्रदान करती है। संचयी एफडी निवेशकों को चक्रवृद्धि लाभ प्राप्त करने के लिए नियमित अंतराल पर अर्जित ब्याज को फिर से मूल धन में मिला कर उस और भी व्याज देती है। गैर-संचयी एफडी के मामले में, ब्याज को नियमित अंतराल पर मासिक या वार्षिक रूप से जमा किया जाता है।

संचयी एफडी में ब्याज दर आम तौर पर त्रैमासिक रूप से मिश्रित होती है मलतब ब्याज की राशि मूलधन के साथ त्रैमासिक रूप में पुनर्निवेशित होती है। जब आप दीर्घकालिक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निवेश कर रहे हों तो संचयी सावधि जमा उपयुक्त होती है। गैर-संचयी एफडी सेवानिवृत्त और पेंशनभोगियों के लिए उपयुक्त हैं जिन्हें दिन-प्रतिदिन के खर्चों को पूरा करने के लिए ब्याज आय की आवश्यकता होती है।

एफडी के समय अंतराल से पहले पैसे निकलने पर जुर्माना

अगर एफडी का समय अंतराल पूरा होने से पहले ही आप एफडी को तोड़ते हो तो कुछ बैंक उस पर आप को जुरमाना स्वरुप 0.5% से 1% तक की कटौती कर लेती है पर कुछ बैंक ग्राहकों को समय से पहले बिना जुर्माना दिए एफडी तोड़ने की अनुमति देते हैं पर उसके लिए कुछ बैंक की सरते रहती है जैसे की अगर आप उस धन को एफडी उत्पादों या बैंक के अन्य उत्पादों में पुनर्निवेशित करे। जुर्माना शुल्क अलग अलग बैंक में अलग अलग हो सकता है। इसलिए, यदि आप एफडी उत्पाद का चयन कर रहे हैं, तो बैंक की नियमावली में ये भी देख ले की समय से पूर्व एफडी को तोड़ने पर कितना दंड है।

एफडी पर मिलने वाला ऋण

सभी राष्ट्रीकृत बैंक आप को आप की एकदि के बदले आप को ऋण प्रदान करती है पर कुछ बैंक में ये सुवुधा नहीं रहती है । एफडी का ये भी एक फीचर रहता है जिसमे आप आपातकाल की स्थिति में बिना अपनी एफडी तुड़वाये उसके बदले में लोन ले सकते है पर आप को इस लोन पर एफडी के मुकाबले 0.5% से 2% तक ब्याज ज्यादा देना होता है जो की बैंक की कमाई होती है। इसलिए एफडी करते समय बैंक के इस फीचर की चालना भी कर ले।

 

 

 

 

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